By Rohit J on Mar 5, 2016, 12:00 AM

रामायण में दो ऐसे व्यक्ति थे...
एक विभीषण और एक कैकेयी...
विभीषण रावण के राज में रहता था
फिर भी नहीं बिगङा...
कैकेयी राम के राज में रहती थी
फिर भी नहीं सुधरी..!!
तात्पर्य...
सुधरना एवं बिगङना केवल मनुष्य के सोच और स्वभाव पर निर्भर होता है
माहौल पर नहीं..

: रावण सीता को समझा समझा कर हार गया था पर
सीता ने रावण की तरफ एक
बार देखा तक नहीं..!
तब मंदोदरी ने उपाय बताया कि तुम राम बन के सीता के
पास जाओ वो तुम्हें जरूर देखेगी..!
रावण ने कहा - मैं ऐसा कई बार कर चुका हूँ..!
मंदोदरी - तब क्या सीता ने आपकी ओर देखा..?
रावण - मैं खुद सीता को नहीं देख सका..!
क्योंकि मैं जब- जब राम बनता हूँ,
मुझे परायी नारी अपनी माता और
अपनी पुत्री सी दिखती है..!
.
अपने अंदर राम को ढूंढें,
और उनके चरित्र पर चलिए..!
आपसे भूलकर भी भूल नहीं होगी..!

॥ जय श्री राम ॥              

 मंदिर के बाहर लिखा हुआ एक खुबसुरत सच......

"अगर उपवास करके भगवान खुश होते,

तो इस दुनिया में बहुत दिनों तक खाली पेट
रहनेवाला भिखारी सबसे सुखी इन्सान होता..

उपवास अन्न का नहीं विचारों का करें....

इंसान खुद की नजर में सही होना चाहिए, दुनियाँ तो भगवान से भी दुखी हैं।

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